जानें कब स्टार्टअप को यूनिकॉर्न, डेकाकॉर्न और हेक्‍टोकॉर्न कहा जाता है और तीनों के बीच मे अंतर क्या होता है

Know when a startup calls UNICORN,DECACORN AND HECTOCORN and difference between them

स्टार्टअप जब लगातार उन्नति करते हुए अपनी कंपनी की वैल्‍युएशन बढ़ाता रहता है , तब उसकी वैल्‍युएशन के आधार पर यूनिकॉर्न, डेकाकॉर्न और हेक्‍टोकॉर्न का दर्जा दिया जाता है ।

यूनिकॉर्न

जब एक स्टार्टअप या छोटी कंपनी लगातार तरक्की करते जाये और तरक्‍की करते हुए जब कंपनी अपनी वैल्यूएशन 1 बिलियन यानी 1 अरब डॉलर या इससे ज्‍यादा की कर ले , तो ऐसे में उस स्‍टार्टअप को यूनिकॉर्न का दर्जा दिया जाता है ।

डेकाकॉर्न

कंपनी द्वारा यूनिकॉर्न के बाद तय की गई यात्रा को पार करते हुए जब कंपनी अपनी कमाई की वैल्यूएशन बढ़ा कर 10 अरब डॉलर की वैल्यूएशन हासिल कर लेती है तो उस कंपनी को डेकाकॉर्न का दर्जा दिया जाता है । भारत में पेटीएम और बायजूस डेकाकॉर्न दर्जा प्राप्‍त की हुई कंपनियां हैं ।

हेक्‍टोकॉर्न

जब कोई कंपनी 10 अरब डॉलर का वैल्यूएशन पार करके 100 अरब डॉलर की वैल्यूएशन हासिल कर लेती है तब वो कंपनी हेक्टोकॉर्न बन जाती है । चीन की Bytedance 400 अरब डॉलर वैल्यूएशन के साथ दुनिया की सबसे बड़ी स्टार्टअप कंपनी है । भारत की किसी भी कंपनी को अभी यह दर्जा हासिल नहीं हुआ है ।

सूनीकॉर्न

सूनीकॉर्न में उन कंपनियों को रखा जाता है, जो कि लगातार उन्नति करते हुए जल्द ही यूनिकॉर्न बनने की क्षमता रखती हों और उनकी वैल्‍युएशन 1 बिलियन डॉलर के पार पहुंचने की राह पर हो ।

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