मैंने ये कविता अपनी मेहनत से लिखी है इसलिए कृपया कोई ये ना कहे कि मैंने इसे कही से देखकर लिखा है। 🙏

 

 

इम्तेहान संकट संग लावा।
पुनि पुनि छात्र के भय दिखलावा।।

प्रश्न बिलोकी
कछु ही ना जानी।
कछु नहीं आवा
सब जन मानी।।

असुर सम
सब बिसय समाना।
अति कोही
जे सब बध करी चाहना।।

जा मन आवा
ता सब लिखही।
उतर लिखा फिर
पुनि पुनि देखही।।

जा कछु लिखा
सब कछु दे दीनहा।
फिर निज गुरु से
आशीष लिन्हा।।


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Himanshu Mishra
Himanshu Mishra

By Himanshu Mishra

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4 thought on “इम्तेहान”

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