चिथड़ो में लिपटी स्त्री आज फिर पड़ी है,
ये विपत्ति हमारे देश में सालों से खड़ी है।
ना जाने इस बिमारी का इलाज कब होगा,
हमारे देश का संसद फिर मौन‌ होगा ।

आज फिर से मोमबत्ती जलाने की नौबत नहीं आती,
अगर द्रोपदी के चीर हरण के समय ,
अपराधियों को आग लगाई होती।
युग बदला सोच नहीं ,
आज फिर से एक स्त्री चौराहे पर नंगी पड़ी मिली।

कुछ लोगों को चार दिनों के लिए शर्म आएगी,
फिर ये शर्म उनकी ना जाने कुछ दिनों बाद कहां खो जाएगी ।
कुछ दिनों बाद ये कहानी फिर से दोहरायी जाएगी,
फिर से जनता कुछ दिनों के लिए सड़कों पर चिल्लाएगी
लेकिन सत्ताधारियों के कान‌ में कुछ ना जायेगी ।

कुछ पार्टियों के लोग अब अपनी तरक्की गिनाएगें ,
ये हमारी पार्टी का व्यक्ति नहीं है ,
ये बात धड़ल्ले से बोल कर निकल जाएंगे।
हमारे देश की मीडिया बस गाड़ियों के पीछे दौड़ लगायेगी,
किस चैनल की गाड़ी आगे निकली ये खबर दिखायेंगे।

उस माता-पिता शायद ही कोई ‌उनका दर्द पुछने जायेगा,
लेकिन कल की अखबार में उन अपराधियों के लिए
कुछ लोगों की सहानुभूति और मानवता
कैसे बड़ी शर्मिंदगी जाग जायेगी।
फिर से हमारे देश की न्यायिक प्रक्रिया और अदालत
एक फैसले ‌के लिए ना जाने कितने वर्ष लगायेगी,
बेबस माता -पिता, थाने और अदालतके दरवाजें
के आगे हर रोज खड़े नज़र आयेंगे।


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Neha

By Neha

9 thought on “चिथड़ो में लिपटा स्त्री का गौरव”
  1. किसे फर्क पड़ता है कि कोई सुधरे 😐
    पंक्तियों में जान है 🙌🙌🙌

  2. Truth of the society…We consecrate female how to live in society but never teach any male. It is shameful for our culture….

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