हां.. हूं शिक्षक, 
वैसे तो पद सम्मानीय है, 
पर केवल नाम का… 
बंदीशो में कटती हैं 
दिनचर्या रोज हमारी, 
घण्टे-मिनट में सिमटी है 
जिंदगी की हमारी पटरी…
आप एक बच्चे से
रहते हो बहुत परेशान… 
हमें सैकड़ों बच्चों का, 
रखना पड़ता है प्यार से ध्यान…
उसमें भी गर खेलते हुए
लग जाए किसी बच्चे को खरोच,
दौड़े आओगे आप विद्यालय 
और बेहद कटु वचनों से 
हम शिक्षकों को पहुंचाओगे चोट…
आप बच्चे को मारकर 
भले अधमरा कर दो गुस्से में, 
हम जो आँख उठा कर देखें, 
तो जी शायद पहुँच जाओगे कोर्ट…
मस्ती करते दिख गये कभी, 
तो मैडम-सर रसिक बन जाते हैं…
जो कभी गलती हुई कुछ तो, 
शिक्षक होकर ज्ञान नहीं का 
ताना भी तो बेहयायी से सुन लेते हैं… 
खैर,फ्लेशबैक में चलते हैं
आखिर कैसे शिक्षक अभ्यर्थी 
आपके शिक्षक बनते हैं…
कर लिया इंटर, 
और है आपको 
प्राथमिक शिक्षक बनना
तो लेलो डी.एल.एड ट्रेनिंग… 
जो है माध्यमिक 
शिक्षक बनने में रूचि तो
स्नातकोत्तर के बाद 
ले लो जी बी.एड. ट्रेनिंग…
ठहरो, ठहरो
दिल्ली अभी दूर है, 
शिक्षक अभ्यर्थी मजबूर है… 
आगे पढ़ो,,, 
तो कर लिया ट्रेनिंग, 
अब समझो शिक्षण अधिगम 
की थोड़ी बहुत मीनिंग… 
बी.एड वगैरह के बाद 
देना है सीटेट या एसटेट, 
फिर पास हुए तो
करो रिक्ति आने की वेट… 
सालों बाद चुनाव जब आयेगा, 
रिक्तयां निकाल सरकार 
लॉलीपॉप ही तो दिखायेगा…
भूल-चूक से गर 
चुनाव तक परीक्षा हो गयी, 
तो समझो अगली चुनाव तक
आपकी रिक्तियां भी टल गयी… 
सालों बाद जब फिर
चुनावी माहौल छायेगा… 
पुरानी रिक्तियों पर 
ज़ोरदार राजनीति गरमायेगा… 
गलती से जो उस वक्त
परिणाम निकल भी जायेगा, 
बीच में बैठे नमकहराम
अब अपनी तिजोरी गरमायेगा… 
किस्मत हुई तो सौ के
दस में चुन लिये जाओगे, 
वरना फिर से तैयारी का
बड़े जोर से झुनझुना बजाओगे… 
हां, तो इसका मतलब 
सरकारी नौकरी से निराश हो
जो प्राइवेट की ओर आओगे
नौकरी बाद में पहले, 
अनुभव पत्र है तो दिखाओगे…
कौन उन्हें ये समझायेगा, 
नौकरी दोगे तभी तो
अनुभव हाथ हमारे आयेगा… 
यात्रा का यहां भी अंत नहीं
क्लास डेमो लेकर फिर 
योग्यता परिक्षण लिया जायेगा… 
दे नौकरी आजादी भी 
बेरहमी से आपका वो दफनायेगा, 
फिर वेतन के नाम पर आपको 
खाली मीठी टॉफी वो भी पकड़ायेगा… 
अंत में परिणाम निकल कर
बस इतना ही आयेगा, 
रोजगार पाकर भी शायद 
वो शिक्षक बेरोजगार कहलायेगा… 

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NehaSWATIBabitabind
Babitabind

By Babita Kumari

वैसे तो कोई खूबी नहीं है मुझमें...लेकिन लोग कहते हैं... सबको खुश रखने की कला बखूबी है मुझमें...!

5 thought on “दास्तां-ए-शिक्षक”
  1. वाह बबीता बहुत खूब लिखा दास्तां ए शिक्षक की दास्तां 👌👌👌👏👏👌👌

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