जब भी हम ऊपर चढ़ना चाहते है,
तो लोग अपने तानों से पैर खींचते है।
अगर कुछ अलग करने जाते है,
तो ये व्यर्थ की बातों से पीछे हटाते है।
गलत को तो गलत कहते है।
सही को भी गलत बताते है।
जाने ये अपने मुख वाणों से,
कितनो को घायल कर जाते है।
जलन से भरी होती है इनकी सोच।
सबसे बुरा रोग, क्या कहेंगे लोग?

हर बात से होती है इनको दिक्कत,
दूसरो की बुराई करने की है फुर्सत।
ये कुछ करे तो खास, हम करे तो बकवास।
उनके जैसा करे तो नकल, पीछे रहे तो बेअक्ल।
आदत से होते है ये लाचार।
अंदर से होते है ये बीमार।
बेकार की बातों मे पड़कर,
करते अपना समय है बर्बाद।
हर बात मे देते है टोक,
सबसे बुरा रोग, क्या कहेंगे लोग?

मीठी बाते बोल मन लेते है,
फिर जाकर दूसरो के सामने हँसी उड़ाते है।
कपड़ों से चरित्र बताते है।
बोली से औकात तक जान जाते है।
शांत स्वभाव को घमंडी बनाते है।
अपनी छोटी सोच के कारण,
बहुतों को बदनाम कर जाते है।
हाँ, किसी लड़की के साथ हो गलत, हो जाएंगे मौन।
उस वक़्त बन जाते है डरपोक,
सबसे बुरा रोग, क्या कहेंगे लोग।


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By PAYAL BURMAN

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