कोरोना काल

आज अहसास हुआ कि दिन तो वो स्वर्णिम थे
जब लोग गरीबी में भी स्वछन्द थे।

नोट कम थे किंतु जिंदगी में खुशियां अपार थीं
हर त्योहार में चारो तरफ बहार थी ।
आज हर तरफ डर और दहशत का माहौल है
जेबें भी खाली लोग भी एकाकी
सड़कों में पसरा सन्नाटा घरों में सिमटी जिंदगी
आज हम ऐसे ही जीने को मजबूर हैं ।
और अपने ही अपनो से कोसों दूर हैं ।
हर तरफ छाई उदासी और वीरानी है ,
विदेश क्या देश भी लगती अब डरावनी है ,
हर तरफ गरीबी और भुखमरी है ।
चंहुं ओर फैली मजबूरी और लाचारी है ।

आओ मिलकर हाथ बढ़ायें
अपने देश को मजबूत बनायें
हर गिरे हुए को मिलकर ऊपर उठायें
सुदृढ़ , खुशहाल और समृद्ध भारत बनायें ।
हे देशवासी उपयोग करो स्वदेशी का
ले संकल्प इस देश के विकास का
करो प्रार्थना दूर हो कोरोना
मानव को संबल मिले
हो वे आत्म निर्भर फिर से
वही दुनियां वही संसार मिले
यही हमारी कामना ।


Subscribe this author


wp-image1022064957121500019.png

PUJA KUMARIRadhaBabitabindSWATI

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

 
       
About US | Contact US | Disclaimer | Terms of Service  | Privacy Policy | Sitemap | Forum | Members | Message 

CopyrightⒸ2020 | BLANKPAGES.IN, All Rights Reserved